ओटीटी प्लेटफॉर्म की सामग्री पर सख्त नियंत्रण की मांग
अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा सांस्कृतिक गौरव की रक्षा के लिए आवाज बुलंद
कटक : अखिल भारतीय साहित्य परिषद (ओडिशा, कटक नगर शाखा) ने बुधवार को सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म की सामग्री को सख्ती से विनियमित करने की आवश्यकता पर बल दिया। परिषद के सदस्यों ने भारत के सांस्कृतिक गौरव पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयोजक गोविंद चंद्र प्रधान, प्रोफेसर प्रसन्न कुमार स्वाईं, प्रोफेसर नीरोद मंत्री, प्रोफेसर मंटू जेना, कवयित्री एवं स्तंभ लेखिका प्रतिभा प्रियदर्शिनी, प्रोफेसर अमुल्य महांती, प्रोफेसर अमुल्य मार्था, और कवि संतोष पंडा सहित अन्य सदस्य शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने ओटीटी सामग्री के अनियंत्रित प्रसार और भारतीय मूल्यों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को प्रमुख मुद्दा बताया।
राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रस्ताव को मिली मंजूरी
परिषद ने बताया कि इस विषय पर उनके द्वारा पारित प्रस्ताव को मध्य प्रदेश के रीवा में 7 से 9 नवंबर तक आयोजित तीन दिवसीय 17वें राष्ट्रीय अधिवेशन में अनुमोदित किया गया है।
उद्घाटन: उद्घाटन सत्र में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारतीय ‘स्व’ (Self) पर प्रेरणादायक भाषण दिया।
मुख्य विषय: अधिवेशन का केंद्रीय विषय “आत्मबोध से विश्वबोध” (“आत्मबोध से विश्वबोध”) था।
उपस्थिति: इस अधिवेशन में आरएसएस के सह-सरकार्यवाह अतुल लिमये और राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराडकर सहित कई राष्ट्रीय पदाधिकारी मौजूद रहे।
सख्त विनियमन के लिए परिषद की मांगें
परिषद ने ओटीटी और गेमिंग ऐप्स पर बढ़ रही हिंसक, अश्लील और संस्कृति विरोधी सामग्री पर कड़ी आपत्ति जताई है। परिषद ने भारत के संवैधानिक और सांस्कृतिक गौरव की रक्षा के लिए निम्नलिखित चार सूत्रीय मांगें रखी हैं:
स्वतंत्र नियामक संस्था (Independent Regulatory Body) का गठन किया जाए।
संवैधानिक और सांस्कृतिक गौरव की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ी निगरानी की जाए।
प्लेटफॉर्म पर आयु-आधारित नियंत्रण (Age-based control) प्रणाली लागू की जाए।
दुराचार को बढ़ावा देने वाले प्लेटफॉर्मों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
कटक नगर शाखा की आगामी योजनाएं
परिषद के निर्णय के अनुसार, कटक महानगर शाखा विभिन्न स्थानों पर वर्ष भर निम्नलिखित कार्यक्रम आयोजित करेगी:
राउंड टेबल चर्चाएं।
संघ साहित्य और भारतीय भाषा व साहित्य पर विचार-विमर्श।
कवि सम्मेलन और साहित्यिक संवाद।
स्कूलों और कॉलेजों में ओटीटी प्लेटफॉर्म के नकारात्मक पहलुओं के खिलाफ जागरूकता और चर्चाएं।

